Thursday, August 13, 2009

आज फिर
वक्त ले आया है उन्ही हवाओं को

दिल के आसमां में
फिर जज़्बातों के बादल उमडेंगे

बारिश होगी फिर रात भर
आंखों से ......

6 comments:

डॉ .अनुराग said...

क्या बात है!!!!

विनय ‘नज़र’ said...

बहुत ख़ूब!

Mithilesh dubey said...

बहुत ख़ूब

महेन्द्र मिश्र said...

bahut bindaas

Jayant chaddha said...

फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपायेंगे तो ऐसी ही बारिशें होंगी...
www.nayikalam.blogspot.com

Anjay said...

Fikr-e-Dunia me befikri se ghoom rha hoon aaj...har aur...har taraf...sanjeevini hai yahan.

dhanyawad

ज़िन्दगी का दायरा कैसे फैलता चला जाता है एक सर्किल का लगातार बढ़ता हुआ जैसे सरकमफेरेंस हो ! और इंसान मानो उस इमेजिनरी लाइन के ऊपर खड़ा...