Sunday, November 26, 2017

ज़िन्दगी का दायरा
कैसे फैलता चला जाता है
एक सर्किल का लगातार
बढ़ता हुआ जैसे
सरकमफेरेंस हो !

और इंसान मानो उस
इमेजिनरी लाइन के
ऊपर खड़ा
अपने सेंटर से कितना दूर
होता चला जाता है !

उसकी जिम्मेदारियाँ
उस सर्किल की रेडियस हैं
या फिर उसकी ख्वाहिशें ! 

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ज़िन्दगी का दायरा कैसे फैलता चला जाता है एक सर्किल का लगातार बढ़ता हुआ जैसे सरकमफेरेंस हो ! और इंसान मानो उस इमेजिनरी लाइन के ऊपर खड़ा...